महाभित्ति का ज्योति पर्दा
Superclusters

महाभित्ति का ज्योति पर्दा

सामने जो दिखाई देता है वह किसी दृश्य की सीमा नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की एक दीवार है — स्लोअन महाभित्ति का वह चमकता हुआ पर्दा जो दृष्टि के बाएँ छोर से दाएँ छोर तक बिना किसी मोड़ या अंत के फैला हुआ है, जैसे किसी रंगमंच पर आग से बुनी हुई झालर लटकाई गई हो। इसकी बनावट एकसमान नहीं है — घने अंबर-सोने के गाँठदार पिंड आकाशगंगा-समूहों के रूप में उभरते हैं, जिनमें से प्रत्येक में सैकड़ों आकाशगंगाएँ दस खरब सूर्यों की ऊष्मा के साथ धधक रही हैं, और उनके बीच नीले-श्वेत पारदर्शी चादरें तनी हुई हैं जिनमें युवा सर्पिल आकाशगंगाएँ और आंशिक रूप से आयनित अंतरआकाशगंगीय माध्यम की हल्की हरिताभ धुंध समाई है। जहाँ-जहाँ शून्य इस चमकती भित्ति को चीरते हैं, वहाँ काली खिड़कियाँ अचानक खुलती हैं — उनके किनारे पर आकाशगंगाओं की एक तीखी पट्टी और उसके पार इतना गहरा अँधेरा कि वह अँधेरा किसी ठोस पदार्थ-सा महसूस होता है। यह दृश्य पाँच सौ मेगापारसेक से भी अधिक विस्तृत एक संरचना का है जो अभी तक गुरुत्वाकर्षण से पूरी तरह बँधी भी नहीं है, क्योंकि श्याम ऊर्जा इसे उसी समय खींचकर अलग कर रही है जब यह स्वयं को जोड़ने का प्रयास कर रही है — एक ब्रह्मांडीय संरचना जो अपने ही अस्तित्व से बड़ी है।

Other languages