दाब विखंडन धूमकेतु पूंछ
Superclusters

दाब विखंडन धूमकेतु पूंछ

आप एक विशाल आकाशगंगा समूह के गुरुत्वाकर्षण केंद्र से दो मेगापारसेक की दूरी पर निलंबित हैं, और सामने का दृश्य मानवीय अनुपात-बोध को पूरी तरह नष्ट कर देता है — दृश्य क्षेत्र के बाएँ तीसरे भाग पर एक सर्पिल आकाशगंगा अपनी पूरी आभा के साथ प्रकट होती है, जिसका सुनहरा केंद्रीय उभार दस अरब वृद्ध तारों की अंबर आभा से दहकता है और उसकी नीलम-हरी भुजाएँ अभी भी प्रचंड तारा-निर्माण में जुटी हैं। किंतु यह आकाशगंगा गिर रही है — अंतःसमूह माध्यम का अदृश्य तूफान, करोड़ों डिग्री तक तप्त पूर्णतः आयनित प्लाज़्मा, इसकी अंतरतारकीय गैस को इतनी हिंसा से छील रहा है कि आकाशगंगा की पिछली सतह से एक धूमकेतु-पुच्छ उत्पन्न होती है — आधे मेगापारसेक में फैली वह धारा विद्युत-गुलाबी हाइड्रोजन-अल्फा उत्सर्जन और ठंडी नीली-हरी द्विआयनित ऑक्सीजन की तंतुओं से बुनी है, जो एक चौड़े आघात-अग्र से शुरू होकर गहरे बैंगनी धुंध में लुप्त हो जाती है। उस पुच्छ के भीतर स्वयं प्रकाश सजीव है — दर्जनों नीले-श्वेत तारकीय पिंड, राम-दाब आघात द्वारा संपीड़ित होकर जन्मे, उस चमकती गैस-धारा में बिखरे अलाव की तरह जलते हैं और अपने चारों ओर पीले नीलम व सियान के प्रभामंडल बुनते हैं। पृष्ठभूमि में हर दिशा से सैकड़ों अंबर-हाथीदाँत रंग की दीर्घवृत्ताकार आकाशगंगाएँ इस दृश्य को घेरती हैं, और उनके बीच अंतःसमूह प्लाज़्मा की मंद, व्यापक ताप-आभा एक असीम अंबर काँच में विसरित प्रकाश की तरह शून्य और आकाशगंगा के बीच की सीमाओं को धीरे-धीरे घोल देती है।

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