कृत्तिका नीली परावर्तन धुंध
Nebulae

कृत्तिका नीली परावर्तन धुंध

आप एक परावर्तन नीहारिका के ज्योतिर्मय हृदय में तैर रहे हैं — न कोई धरातल है, न क्षितिज, केवल चारों दिशाओं में फैला एक अनंत विद्युत-नील प्रकाश जो अंतरिक्ष से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष के भीतर से उत्पन्न होता प्रतीत होता है। यह दीप्ति किसी सतह की नहीं, एक त्रि-आयामी धूल-कोहरे की है — सिलिकेट और कार्बनयुक्त कणों की असंख्य परतें, जिनमें से प्रत्येक B2 श्रेणी के तारे के लघु-तरंगदैर्घ्य फोटॉनों को हर दिशा में एक साथ बिखेर रही है, और इसीलिए प्रकाश में कोई छाया नहीं, केवल गहराती नील आभा है जो तारकीय केंद्र के निकट-श्वेत दीप्ति से क्रमशः गहरे नील और फिर गहन इंडिगो में विलीन होती जाती है। धूल के सूक्ष्म तंतु तारे से त्रिज्यीय रूप से बाहर की ओर फैलते हैं, उनके किनारे धुंधले और कोमल, जैसे वे परिवेशी प्रकाश में धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए घुलते जा रहे हों। पृष्ठभूमि के तारे इस अर्ध-अपारदर्शी माध्यम से झाँकते हैं — उनका प्रकाश नीला और मंद, मानो विशाल रंगीन काँच की असंख्य परतों से छनकर आया हो — और उनकी उपस्थिति इस बात का स्मरण कराती है कि यह चमकता कोहरा प्रकाश-वर्षों की गहराई तक फैला हुआ है।

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