लाल कोशिकाओं के बीच ट्रिपैनोसोमा सर्प
Protists & protozoa

लाल कोशिकाओं के बीच ट्रिपैनोसोमा सर्प

रक्त की इस जीवित धारा के भीतर, दृष्टि हर दिशा में हल्के गुलाबी-गुलाबी उभयावतल चकतियों की एक घुटन भरी दीर्घा में विलीन हो जाती है — प्रत्येक लाल रक्त कोशिका सात माइक्रोमीटर की एक कोमल, रबड़-सी कुशन, जिसके पतले केंद्र से ऊष्म परावर्तित प्रकाश झाँकता है और रिम पर गहरे कार्माइन-मूंगे के घेरे में सघन हो जाती है। इन्हीं चकतियों के संकरे गलियारों में, जैसे शिलाओं के बीच सर्प विचरते हों, Trypanosoma brucei के कई परजीवी नीले-बैंगनी वक्रों में लहराते हैं — उनका पंद्रह से तीस माइक्रोमीटर लंबा शरीर किनारे पर दौड़ती कंपायमान पताका-झिल्ली द्वारा संचालित धीमी पार्श्विक तरंगों में झूलता है, जो इंडिगो और लैवेंडर की क्षणिक इंद्रधनुषी रेखा बिखेरती है। प्रत्येक परजीवी देह के भीतर गहरे नीलबैंगनी सघन बिंदु उभरते हैं — पश्च छोर पर काले बीज-सा किनेटोप्लास्ट और मध्य में कुछ बड़ा, गोल केंद्रक — जैसे गीले जलरंग में अंधकार का स्याह रिसाव। जिम्सा के इस संसार में गुलाब और बैंगनी का वर्चस्व है, प्लाज़्मा का तरल अंबर-काँच-सा प्रकाश कोशिकाओं की जेली-सतहों पर मृदु दीप्ति उकेरता है, और परजीवियों की लहराती झिल्लियाँ ही इस कोमल, दबे हुए, अनंत गुलाबी संसार में एकमात्र गतिशील जीवन का प्रमाण हैं।

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