जैव-प्रकाशित श्रृंखला अर्धरात्रि
Gelatinous plankton (salps, larvaceans)

जैव-प्रकाशित श्रृंखला अर्धरात्रि

आधी रात के इस अथाह अंधकार में, दो मीटर की गहराई पर, जहाँ प्रकाश का कोई नामोनिशान नहीं, एक सैल्प शृंखला अचानक जीवित हो उठती है — पच्चीस ज़ूऑइड्स की एक पंक्ति, जैसे किसी ने शून्य में एक झूमर टाँग दिया हो, हर एक अंगुष्ठ के आकार का काँच का पीपा, और उनमें से नीली-सफ़ेद रोशनी की एक लहर अगले से पिछले की ओर क्रमशः दौड़ती है, प्रत्येक तीन सौ मिलीसेकंड की चमक में पूरी देह भीतर से प्रकाशित होती है। यह बायोल्युमिनेसेंस कोई सतही चमक नहीं, बल्कि 476 नैनोमीटर की वह शल्य-शुद्ध नीली तरंगदैर्ध्य है जो जीव की जेल-सी पारदर्शी देहभित्ति के भीतर से ही उत्सर्जित होती है, जिससे वृत्ताकार पेशी-पट्टियाँ अंधेरे छल्लों की तरह उभरती हैं और आँत का एम्बर रंग उस नीली आभा में एक दहकते अंगारे-सा तैरता दिखता है। इन प्राणियों का शरीर 95 प्रतिशत से अधिक जल है, उनका अपवर्तनांक समुद्री जल के लगभग समान — 1.340 बनाम 1.334 — इसलिए वे पारदर्शिता की सीमा पर जीते हैं, दृश्य और अदृश्य के बीच झूलते हुए। पृष्ठभूमि में, हर दिशा में, अन्य शृंखलाएँ भी स्पंदित हो रही हैं — कुछ धागों की तरह, कुछ बिंदुओं की तरह, सबसे दूर वाली तो केवल नीली चिनगारियाँ हैं जो तारों से अलग नहीं लगतीं — और उनके बीच का अंतराल न धुंध है, न कोहरा, बल्कि नमकीन जल का वह पूर्ण, अपरिवर्तनीय अंधकार है जो हर फ़ोटॉन को लौटने से पहले ही निगल लेता है।

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