रेडियोलेरियन कीचड़ कब्रिस्तान
Radiolarians

रेडियोलेरियन कीचड़ कब्रिस्तान

आप गहरे समुद्र की तलहटी से मात्र पाँच मिलीमीटर ऊपर हवा में निलंबित हैं, और नीचे फैला हुआ दृश्य किसी ध्वस्त नगर के खंडहर जैसा प्रतीत होता है — सैकड़ों रेडिओलेरियन परीक्षणों की सिलिका-निर्मित जालीदार संरचनाएँ धूसर मृत्तिका में कंधे से कंधा मिलाए दबी पड़ी हैं, उनके गोलाकार और शंक्वाकार रूप तिरछी इलेक्ट्रॉन-किरण के प्रकाश में तीव्र श्वेत और पूर्ण कृष्ण छाया के बीच उभरते हैं। ये परीक्षण वास्तव में करोड़ों वर्षों में समुद्री सतह से डूबकर आए एककोशिकीय जीवों के खोल हैं — अनाकार ओपल सिलिका से निर्मित, जिनके सूक्ष्म छिद्र एक से पंद्रह माइक्रोमीटर व्यास के हैं और अब गहरी छाया-खाइयों की तरह नीचे की ओर धँसते दिखते हैं, मानो किसी डूबे हुए गिरजाघर की खिड़कियाँ हों। निकट ही एक स्पुमेलेरियन परीक्षण लगभग अखंड अवस्था में विराजमान है, उसके तीन संकेंद्रित गोलाकार जाल अभी भी एक-दूसरे के भीतर व्यवस्थित हैं, जबकि उसकी एक टूटी हुई मेरुदंड-शाखा पड़ोसी संरचनाओं पर गिरी पड़ी है और उसका खोखला गोलाकार परिच्छेद स्पष्ट दृष्टिगोचर है। यह समूचा दृश्य न कोहरे का धूसरपन है, न वायुमंडल का — यह इलेक्ट्रॉनों के भौतिकी-नियंत्रित प्रकाश का धूसरपन है, जो लाखों वर्षों की भूगर्भीय संपीड़न से सुरक्षित इस गणितीय जीवन के नेक्रोपोलिस को बिना किसी रंग या ऊष्मा के, केवल तीक्ष्ण ज्यामितीय सत्य में प्रकट करता है।

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