प्रवाल शैवाल पर सूक्ष्म क्रस्टेशियन
Micro-crustaceans

प्रवाल शैवाल पर सूक्ष्म क्रस्टेशियन

आप ओरेगन तट की एक ज्वार-द्रोणी के तल पर हैं, मात्र दो सेंटीमीटर गहरे जल के नीचे, और आपके सामने जो विस्तार फैला है वह किसी भूवैज्ञानिक परिदृश्य से कम नहीं लगता — गुलाबी-बैंगनी कोरलाइन शैवाल की कैल्सीकृत पपड़ी, जिसकी हर बहुभुजाकार प्लेट एक चौक के फर्श-पत्थर जितनी विशाल प्रतीत होती है, उस पर डायटम की सुनहरी-तांबई जैवफिल्म बीजांतरी मोज़ेक की तरह जड़ी हुई है। इसी सतह पर दो *Tigriopus californicus* हार्पैक्टिकॉइड कॉपेपॉड — धमनी-रक्त जैसे चमकीले नारंगी-लाल, अपने चपटे कवचधारी शरीर से प्रत्येक उभार को आलिंगन करते हुए — अपनी छोटी-छोटी एंटेनुल से बायोफिल्म को थपथपाते आगे बढ़ रहे हैं, जैसे सूक्ष्म बख्तरबंद वाहन किसी अज्ञात महाद्वीप को पार कर रहे हों। प्रशांत महासागर का दोपहरी सूर्य जल की हिलती सतह से गुज़रकर नीचे कॉस्टिक प्रकाश के जाल बुनता है — सफेद-सोने की लकीरें जो पलक झपकते बनती और बिखरती हैं, और पूरे तल को जीवंत दहकती रोशनी से भर देती हैं। ऊपर देखें तो स्नेल-विंडो का नीला आकाशीय वृत्त ग्रेनाइट रिम की अंधेरी सिल्हूट में जड़ा एक दीप्त द्वार बन जाता है, और उसके इर्द-गिर्द चांदी-सफेद बार्नेकल-शंकु और पन्ने जैसी पारदर्शी *Ulva* की परतें मिलकर एक ऐसा संसार रचते हैं जो अपने असली आकार से अनंत गुना बड़ा महसूस होता है।

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