विस्फोटित प्रोटोप्लास्ट बादल
Giant unicells

विस्फोटित प्रोटोप्लास्ट बादल

सूरज की रोशनी ऊपर से चौड़े उष्णकटिबंधीय स्तंभों में उतरती है, और आप जल-स्तंभ में निश्चल तैरते हुए एक ऐसी घटना के साक्षी बन रहे हैं जो अभी भी धीमी गति में घटित हो रही है — आपके ठीक सामने, प्रवाल-शैल की ऊबड़-खाबड़ सतह पर एक फटी हुई *Ventricaria ventricosa* कोशिका की जैतून-श्याम झिल्ली किसी ढहे हुए तंबू की तरह बिखरी पड़ी है, उसके मुड़े हुए किनारे अभी भी कोशिका-रस से चमक रहे हैं। उस एकल विशाल कोशिका के भीतर से, जो स्वयं में एक पूर्ण जैव-रासायनिक संसार थी, अब सैकड़ों पुत्री-प्रोटोप्लास्ट — प्रत्येक एक लगभग पूर्ण गोले के रूप में, रेत के कण से मिर्च के दाने तक के आकार में — चारों दिशाओं में बिखर रहे हैं, उनके क्लोरोप्लास्ट-भरे कोश उन्हें गहरे पन्ने-हरे रंग में रंगते हैं और पारभासी झिल्ली के किनारे सूर्य-प्रकाश को सोने-हरे दीप्तिमान प्रभामंडल में बदलते हैं। यह घटना वनस्पति-विज्ञान की नहीं, एक ब्रह्मांडीय विस्फोट की छवि देती है — एक हरित-सुनहरा तारकीय विस्फोट जो नीले-पारदर्शी समुद्र-जल में धीरे-धीरे एक निहारिका की तरह फैल रहा है, और नीचे गुलाबी-बैंगनी कोरलाइन शैवाल की चाकयुक्त सतह मंद धुंध में विलीन होती जाती है। प्रत्येक प्रोटोप्लास्ट अपनी झिल्ली, अपनी जैव-रसायन और भविष्य में एक नए जीव बनने की संभावना लिए हुए है — यह एककोशिकीय जीवन की वह पराकाष्ठा है जहाँ एक कोशिका का अंत असंख्य नए जीवनों का आरंभ बन जाता है।

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