एसिटाबुलारिया केंद्रक भीतरी दृश्य
Giant unicells

एसिटाबुलारिया केंद्रक भीतरी दृश्य

आप एक ऐसे जीवित कक्ष के भीतर निलंबित हैं जो किसी छोटे से गोले जितना विशाल लगता है — *Acetabularia* की मूल जड़िका के अंदर, जहाँ चारों ओर की कोशिका-भित्ति हाथीदाँत जैसी श्वेत और बारीक रेशेदार है, मानो दबी हुई सन की चादर पर प्रकाश पड़ रहा हो। उस भित्ति से सटी हुई सैकड़ों हरितलवक हैं — चपटी, गहरी पन्ना-हरी चकतियाँ — इतनी सघन कि वे एक जीवित रंगीन काँच की मोज़ेक बनाती हैं, और उनके पार से समुद्री धूप छनकर भीतर आती है, सोने-हरे रंग की उस अम्बर आभा की तरह जो किसी प्राचीन काँच से गुज़री हो। इस सारे प्रकाशित संसार के केंद्र में एक विशाल केंद्रक तैर रहा है — लगभग अस्सी माइक्रोमीटर व्यास का, मोती-धूसर और हल्के लैवेंडर रंग का गोला, जिसके हृदय में एक गहरा, अस्पष्ट केंद्रिका धुंधले पत्थर की तरह विराजमान है। यह केंद्रक *Acetabularia* की समूची जैविक सत्ता का एकमात्र आनुवंशिक आधार है — एकल केंद्रक जो पूरे बहुसेंटीमीटर लंबे जीव को नियंत्रित करता है, और इसके चारों ओर कोशिकाद्रव्य की मंद, लयबद्ध धाराएँ — सुनहरे और琥珀रंगी कण — चक्रीय भ्रमण में घूमते हैं, इतनी धीरे कि वे किसी भूवैज्ञानिक गति जैसी लगती हैं, न कि किसी प्रवाह जैसी।

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