आप एक विशाल ओब्सीडियन मैदान के ठीक ऊपर मँडरा रहे हैं — गीले काँच जैसा काला substrate हर दिशा में एक जमे हुए झील की तरह फैला है, और उसकी सतह पर पानी की पतली परत ठंडे ऊपरी प्रकाश को काँपती चाँदी की लकीरों में बिखेर रही है। ठीक सामने, *Dugesia dorotocephala* के दो जीवित भू-खंड एक ही साझे उद्गम से अलग हो रहे हैं — अग्र-भाग महोगनी-भूरे रंग की एक मज़बूत पर्वत-श्रृंखला की तरह आगे खिंच रहा है, उसके दोनों ओर मांसपेशीय संकुचन की तरंगें धीरे-धीरे लहराती हुई चलती हैं, जबकि पश्च-भाग काँच से चिपककर अपने adhesive glands की पूरी ताक़त से ज़मीन थामे हुआ है। दोनों के बीच — और यही इस पूरे दृश्य का गुरुत्वाकर्षण केंद्र है — एक ऊतक का धागा तना हुआ है जो इतना महीन और पारदर्शी है कि ऊपरी प्रकाश उसके आर-पार गुज़रकर उसे अँधेरे के विरुद्ध स्वयंप्रकाशित सा बना देता है, मानो टूटने से पहले की अंतिम क्षण में parenchymal कोशिकाएँ और muscle fibers अपनी लोच की आख़िरी सीमा पर झूल रहे हों। काले substrate पर mucus की चाँदी जैसी राहें एक-दूसरे को काटती हुई इस जीवन-नाटक से दूर फैलती जाती हैं — आणविक शिलालेख जो उस विभाजन की गवाही देते हैं जो अब पूरे होने की कगार पर है।