दर्शक के सामने एक विशाल, लगभग समतल दीवार-सी चमकती संरचना भर जाती है, जो एम्बर-स्वर्ण प्रकाश के घने नोडों और उनके चारों ओर फैली नीली-बैंगनी प्रायिकता-धुंध से बनी लगती है। यह साधारण ठोस पदार्थ नहीं, बल्कि नाभिकीय द्रव्य और इलेक्ट्रॉन बादल का अत्यंत संकुचित विन्यास है, जहाँ मजबूत बल की कड़ियाँ कणों को ऐसे कसकर बाँधती हैं कि गहराई लगभग मिट जाती है और केवल चौड़ाई-ऊँचाई का अनंत विस्तार शेष रहता है। उसके भीतर सूक्ष्म तापीय-सी चमक, स्थिर-सी शांति और हल्का विद्युत-चुम्बकीय कंपन एक साथ महसूस होता है, मानो आप प्रकाश-रहित रिक्तता के बीच से बिना किसी घर्षण के गुजर रहे हों। दूर-दूर तक फैले इस दृश्य में रंग बहुत धीमे, लगभग अप्रकट ढंग से बदलते हैं—यह कणीय रूपांतरण और स्वाद-दोलन का संकेत है—और कहीं एक क्षणिक लाल-एंबर चिंगारी कमजोर बल की दुर्लभ झलक बनकर तुरंत विलीन हो जाती है।