जल में कशाभी पकड़ा गया
Radiolarians

जल में कशाभी पकड़ा गया

अंधेरे की इस गहराई में आप एक ऐसे क्षण के साक्षी हैं जो जीवन और मृत्यु के बीच की एकमात्र सीमा-रेखा पर टिका है — रेडिओलेरियन का एक्सोपोडियम, काँच की किसी पारदर्शी तलवार की भाँति, अपने भीतर की समानांतर माइक्रोट्यूब्यूल पंक्तियों को ठंडी नीली आभा में नहलाए हुए आपके सामने फैला है, और उसकी सतह पर प्रिज्मीय प्रकाश-कंपन किसी जीवित क्रिस्टल की धड़कन जैसे महसूस होते हैं। ठीक इसी क्षण एक माइक्रोमोनास कशाभिका — पन्ने की तरह हरी, अपने दो कशाभिकाओं को अभी भी प्रकाश-चाप में थिरकाती हुई — एक्सोपोडियम की झिल्ली से स्पर्श करती है, और उस स्पर्श-बिंदु पर एक काली अर्धचंद्राकार झिल्ली धीमे सूर्यग्रहण की तरह उस हरे ग्रह को घेरने लगती है। यह रेडिओलेरिया की शिकार-पकड़ की वह जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें एक्सोपोडियम का कोशिकाद्रव्य, उष्ण अम्बर-धूसर रंग धारण करते हुए, शिकार को भक्षण-रसधानी में बंद करने की अपरिहार्य यात्रा आरम्भ करता है। दूर, एक्सोपोडियम की गहराई में, पहले पकड़े गए जीवों के मंद नारंगी-गेरुए अवशेष मंद प्रकाश-दीपों की तरह केंद्रीय कैप्सूल की ओर प्रवाहित होते हैं — यह स्मरण दिलाते हुए कि इस पारदर्शी स्थापत्य में जो भी एक बार प्रवेश करता है, वह लौटता नहीं।

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