रात का उष्णकटिबंधीय शिकारी
Flatworms

रात का उष्णकटिबंधीय शिकारी

उष्णकटिबंधीय वन की इस घनी रात में, एक सड़ते हुए पत्ते की निचली सतह पर चिपका हुआ दर्शक एक अद्भुत दृश्य देखता है — बाईं ओर रखे एक लट्ठे पर उगी ब्रैकेट कवक की मंद नीली-हरी जैव-प्रकाशमान चमक पूरे परिदृश्य को एक ठंडी, रहस्यमय रोशनी में नहला रही है, और उसी प्रकाश में एक चॉकलेटी-काली और क्रीम धारीदार रिबन जैसी देह धीरे-धीरे आगे सरकती दिखती है। यह Bipalium kewense है — एक भूमि-प्लैनेरियन — जिसका हथौड़े के आकार का सिर सड़ी-गली पत्ती की रेशेदार शिराओं के ऊपर झुका हुआ है, उसके रासायनिक संवेदी किनारे लगभग सतह को छूते हुए उस आणविक गंध-पगडंडी को पढ़ रहे हैं जो उसे शिकार तक ले जाएगी। इस जीव के अर्धपारदर्शी ऊतक के भीतर आंत की शाखाएँ धुंधली छाया की तरह दिखती हैं, और इसके पीछे कवक के नीले प्रकाश में चमकती एक पतली श्लेष्म-रेखा ही इस शिकारी के गुज़रने का एकमात्र प्रमाण है। दृश्य के दाहिने छोर पर एक केंचुए की पीली-गुलाबी देह पत्ती के टुकड़े के नीचे से झलकती है — उसके वलयाकार खंड इस रिबन-शिकारी के पूरे शरीर जितने चौड़े — और दोनों के बीच की दूरी, जो कुछ ही शरीर-लंबाइयों की है, क्षण-दर-क्षण सिकुड़ती जा रही है।

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