स्पाइरोगाइरा सर्पिल सीढ़ी तालाब
Tardigrades

स्पाइरोगाइरा सर्पिल सीढ़ी तालाब

यहाँ से दृश्य ऐसा है मानो किसी काँच की पनडुब्बी के पारदर्शी पतवार से चिपके हों — स्पाइरोगायरा की एक विशाल कोशिका की चिकनी, हल्की मोमी बाहरी दीवार पर हमारे मुड़े हुए पंजे辛苦 से पकड़ बनाए हुए हैं, और यह कोशिका हमारे अपने शरीर की लंबाई से कोई तीस गुना चौड़ी है। उस स्फटिक-स्वच्छ हरी दीवार के आर-पार, असंभव रूप से विशाल और असंभव रूप से निकट, हेलिकल क्लोरोप्लास्ट की हरित रिबन एक सतत सर्पिल सीढ़ी की भाँति ऊपर को घूमती है — उसके पायरेनॉइड पिंड ऊपर से उतरते प्रकाश को सुनहरे-सफेद मोतियों की लड़ी की तरह पकड़ते हैं, जैसे तंतु स्वयं भीतर से प्रकाश उत्पन्न कर रहा हो। बाईं ओर खुले जल में एक डेस्मिड कोशिका स्वतंत्र रूप से तैरती है, उसकी सुडौल द्विपालित देह के प्रत्येक खंड में गहरे पन्ने-रंग के जालीदार क्लोरोप्लास्ट प्रकाशसंश्लेषण की अपनी आभा से दमक रहे हैं। तभी दाईं ओर से एक पैरामीशियम — किसी मालवाहक जहाज़ जितना विशाल — मंद सर्पिल गति में मध्य-जल को चीरता हुआ निकलता है, उसके पक्ष्माभ उतरती रोशनी में चाँदी-सी इंद्रधनुषी आभा बिखेरते हैं, और उसके जाने से उठे हल्के भँवर की खिंचाव हमारी पकड़ को ज़रा-सा हिला जाती है।

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