ग्रंथि ट्राइकोम तेल बुलबुला
Plants — meristems & tissues

ग्रंथि ट्राइकोम तेल बुलबुला

आपके सामने जो दृश्य है, वह किसी साधारण वन-छत्र का नहीं, बल्कि टमाटर के पत्ते की सतह पर उगे एक ग्रंथिल रोम का शीर्ष है — चार चपटी, गुम्बदनुमा स्रावी कोशिकाओं का एक मुकुट, जिनका हरित-सुवर्ण कोशिकाद्रव्य भीतर से उभरता हुआ क्यूटिकल की भीतरी सतह को धीरे-धीरे दबाए हुए है, जैसे गर्म काँच में अँगुठे का निशान। उन कोशिकाओं के ऊपर क्यूटिकल एक तनी हुई, चमकती फफोले-सी संरचना में फूल गई है — तारपीन और टर्पेनॉइड यौगिकों के संचित आवश्यक तेल का एक पारभासी, अंबर-रंगी लेंस, जिसकी सतह पर तिरछे प्रकाश की एक तरल, मंद लकीर किसी छोटे चंद्रमा के संधि-रेखा की तरह वक्र बनाती है, और भीतर घनत्व-प्रवणताएँ भूत-सी पारदर्शी धाराओं में घूमती हैं। नीचे, छः स्तरीय वृंत-कोशिकाएँ एक वास्तुशिल्पीय स्तंभ में संकरी होती हुई अधस्त्वचा की ओर उतरती हैं, जहाँ आधार-कोशिका अपनी मोटी, पेक्टिन-सुदृढ़ भित्ति के साथ जिगसॉ-पहेली-नुमा एपिडर्मल कोशिकाओं की परत में धँसी हुई इस पूरे स्रावी मीनार को थामे है। चारों ओर पत्ते की सतह पर छड़-रूपी और पट्टिका-रूपी क्यूटिकुलर मोम-क्रिस्टल तिरछी छाया की कठोर रेखाएँ डालते हैं, और उनके बीच मोम की मंद नीली-श्वेत चमक इतनी फीकी है कि ऊपर टँगा तेल-फफोला — तनाव और विसर्जन की उस सीमा पर काँपता हुआ — एक ज्वलंत, एकाकी प्रकाश-बिंदु की तरह दमकता है।

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