पत्थर उठा — जीवन उजागर
Flatworms

पत्थर उठा — जीवन उजागर

पत्थर उठते ही तीखी दोपहरी धूप उस दुनिया में घुस आती है जो अब तक अंधेरे में थी — एक चपटी, गीली, जीवित छत के नीचे की दुनिया, जहाँ बीस देहें अचानक उजाले में नहाई खड़ी हैं, कोई सिकुड़ती हुई, कोई अभी भी आगे खिंचती हुई। ग्रेनाइट की यह छत — गेरुए और जंग रंग की शैवाल-परतों से ढकी — हमारे ठीक ऊपर है, और नीचे फैला है डायटम और जीवाणु-मैट का वह कालीन जो कांसे और गहरे जैतूनी रंग का है, जगह-जगह नीली-चाँदी चमक फेंकता हुआ जहाँ प्रकाश उसके कोण को छूता है। किनारों पर खड़े जीव — Dugesia की ये चारकोल-काली, मांसल पट्टियाँ — पहले से ही पीछे हट रही हैं, उनके अग्र सिरे अंदर की ओर मुड़ते हुए, देह की पेशियाँ सिकुड़न की दृश्यमान लहरों में उठती हुई, क्योंकि उनके सरल नेत्र-धब्बे प्रकाश-प्रवणता को एक संकट की तरह पढ़ते हैं। फर्श पर बिछे श्लेष्म-मार्ग — कुछ ताज़े और चाँदी-सफ़ेद, कुछ पुराने और एम्बर-मंद — रात भर की गतिविधियों का नक्शा हैं, और फ्रेम के निचले कोने में एक कैडिसफ्लाई लार्वा का खोल खड़ा है जैसे रेत और क्वार्ट्ज़ की किसी प्राचीन इमारत का खंडहर, रेशम की धागे प्रकाश में पीले-सफ़ेद चमक उठते हुए।

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