विनाश शून्य मंडल
Subatomic

विनाश शून्य मंडल

दृश्य में दो विशाल, नीले-बैंगनी तरंग-मेघ एक-दूसरे की ओर बढ़ते हुए केंद्र में आकर लगभग शून्य-आयामी, तीव्र श्वेत बिंदु में ढहते दिखाई देते हैं, और उसी क्षण उससे विपरीत दिशाओं में सुनहरी गामा-किरणों की दो फैलती हुई वलयाकार तरंगें निकलती हैं। यह कोई ठोस पदार्थ नहीं, बल्कि क्षेत्र-गतिकी का नाटकीय प्रदर्शन है: क्वांटम वैक्यूम की उथल-पुथल, जहाँ आभासी इलेक्ट्रॉन–पॉज़िट्रॉन युग्म क्षणिक तीव्रता पर प्रतिक्रिया देकर प्रिज़्मीय आभा रचते हैं। चारों ओर गहरा नील-श्याम शून्य एक अंतहीन, मंद-चमकती गुंबदनुमा रिक्तता की तरह फैलता है, जिससे ऊर्जा के इस विस्फोट की चमक और भी विशाल लगती है। वलयों के पार जाते ही वह इंद्रधनुषी प्रभामंडल फीका पड़कर फिर से अंधकार में घुल जाता है, मानो ब्रह्मांड की सबसे सूक्ष्म तहों में उठी एक झिलमिलाहट अभी-अभी शांत हुई हो।

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