जैव-प्रकाशमान रात्रि समुद्र
Phytoplankton & coccolithophores

जैव-प्रकाशमान रात्रि समुद्र

रात के घने अंधेरे में छाती तक डूबे हुए, जब हाथ पानी को चीरते हैं तो ठीक 460 नैनोमीटर की तरंगदैर्ध्य पर एक असंभव नीली रोशनी फूट पड़ती है — यह *Lingulodinium polyedra* की लाखों कोशिकाओं का एक साथ जागना है, जिनमें से हर एक केवल छह से बारह माइक्रोमीटर की है, फिर भी अपने भीतर लूसीफेरेज़ और लूसीफेरिन से भरे स्सिन्टिलॉन लिए बैठी है जो यांत्रिक दबाव पड़ते ही एक श्रृंखला-प्रतिक्रिया में दहक उठते हैं। उंगलियों के पीछे छूटे निशान दो पूरे सेकंड तक ठहरे रहते हैं, मानो अशांत जल ने खुद अपना नक्शा बना लिया हो — हर भंवर, हर लहर की ज्यामिति इस जीवित प्रकाश में अंकित। पचास मीटर दूर एक नाव की लकीर नीली-सफ़ेद रोशनी की एक ठोस नदी बन गई है जो अंधेरे में दूर तक फैली है, और शरीर के चारों ओर की सतह पर हर साँस, हर हृदयस्पंद नई कोशिकाओं को जगाता है, जिससे देह का सबसे छोटा हिलना भी जीवन्त प्रकाश में लिख दिया जाता है। यह जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया — जो जन्तुओं के उद्भव से भी पुरानी है — इस क्षण पूरे समुद्र की सतह को एकमात्र और अटल रंग देती है: वह नीला जो आकाश और जल की सीमा को, दृश्य और अदृश्य की रेखा को, जीवित और निर्जीव के भेद को मिटा देता है।

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