मिलिओलिड समूह, समुद्री घास मैदान
Foraminifera

मिलिओलिड समूह, समुद्री घास मैदान

समुद्री घास की एक हरी पत्ती पर, जो इस पैमाने पर किसी अजनबी ग्रह की सतह जैसी विशाल और लहरदार लगती है, तीन विशाल मटमैले-हाथीदाँत रंग के गोल-अंडाकार ढाँचे खड़े हैं — *Quinqueloculina seminulum* के परीक्षण-कवच, जो अपरिष्कृत चीनी मिट्टी की तरह घने और अपारदर्शी हैं, उनकी चिकनी दीवारें कोई प्रकाश आर-पार नहीं जाने देतीं, बल्कि उसे अपनी सतह पर रोककर एक मंद, रेशमी आभा में बदल देती हैं। इन कवचों की सबसे विशिष्ट पहचान उनकी सीवन-पट्टियाँ हैं — चौड़ी, चिकनी उभरी हुई रेखाएँ जो हर ढाँचे के इर्द-गिर्द एक वास्तुशिल्पीय भूगोल की तरह कई परस्पर-विस्थापित तलों में लिपटी हैं, हर पट्टी अपने नीचे एक हल्की-सी छाया और ऊपर एक पतली रोशनी की लकीर छोड़ती है। इन तीनों कवचों के द्वार-छिद्रों से छोटे-छोटे एम्बर रंग के जालीदार कूटपाद बाहर निकले हैं, जो बहती हुई कोशिकाद्रव्य से धड़कते प्रतीत होते हैं और नीचे की *Posidonia* पत्ती की सतह तथा उस पर जमी जीवाणु-परत को छूते हैं — यही वह जीवित संजाल है जिससे ये एककोशिकीय प्राणी अपना भोजन पकड़ते और अपने परिवेश को पहचानते हैं। नीचे की पत्ती पर गुलाबी और मैजेंटा रंग की चूनेदार शैवाल की पतली परत और हरे रंग की समानांतर शिराएँ मिलकर एक ऐसा आधार बनाती हैं जो इन पीले-सफेद खनिज स्मारकों को एक उष्ण, रंगीन दुनिया में टिकाए रखता है, जबकि ऊपर पाँच मीटर की गहराई पर सतही लहरों से छनकर आती हुई चाँदी-हरी रोशनी धीमी-धीमी लहरदार आकृतियाँ हर सतह पर चित्रित करती रहती है।

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